दुबई समेत पूरे अमीरात से आज भारतीय प्रवासी को अपने घर पैसा भेजने पर मिलेगा बड़ा फायदा, जानिए वजह

UAE में बड़ी तदाद में भारतीय प्रवासी और कामगार रहते हैं और ये लोग यहाँ पर अच्छी नौकरी के लिए आते हैं।  इस वजह है कि यूएई से बड़ी तदाद में प्रवासी अपने परिवार जनों को पैसा भी भेजते हैं। वहीं इस बीच खबर है कि UAE से भारत पैसा भेजने पर अच्छा फायदा मिल रहा है।

दरअसल यूएई दिरहम के मुकाबले भारतीय रुपया में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और इसके पीछे की वजह अमेरिकी डॉलर की बनी। जानकारी के अनुसार, 12 मई को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 77.58 पर खुला।

1 दिरहम की कीमत हुई 21.12 भारतीय रुपए

अगर आज 1 दिरहम के मुकाबले भारतीय रूपए की बात करें तो 21.12 पर ट्रेंड कर रहा है। ऐसे में अगर कोई भारतीय कामगार या फिर प्रवासी संयुक्त अरब अमीरात से अपने घर पैसा भेजता है तो उसे एक्चेंज रेट में उसे आज अच्छा रेट मिलने की वजह से ज्यादा फायदा हो सकता है, हालांकि एक्चेंज रेट लगातार परिवर्तित होती रहती है। ऐसे में प्रवासी और कामगारों को सलाह दी जाती है कि लेनदेन करने से पहले मुद्रा विनिमय प्रदाता के साथ सटीक दर की पुष्टि करें।

आपको बता दें, डॉलर के कीमत में बदलाव होने पर भारतीय रूपये की कीमत में भी बदलाव होता है और इसके कारण UAE से भारत पैसे भेजने वालो को बड़ा फायदा होता है।

वहीं एक एक्सचेंज हाउस के एक अधिकारी ने कहा, “भारतीय मुद्रा को शेयर बाजारों से जो संकेत मिल रहे हैं वो सभी संकेत नकारात्मक हैं।” भारतीय प्रवासियों द्वारा कुछ प्रेषण भी हो सकते हैं – लेकिन कई लोगों ने महीने की शुरुआत में ही अपना मासिक भुगतान पहले ही भेज दिया था, जब रुपया लगभग 20.80 के स्तर पर था।”

वहीं मुंबई के एक विदेशी मुद्रा विश्लेषक ने कहा कि अब तक, भारतीय केंद्रीय बैंक, आरबीआई के बाजार में हस्तक्षेप करने का कोई संकेत नहीं है। बेंचमार्क सेंसेक्स 677 अंक (सुबह 9.45 बजे तक) फिसल रहा है।

इसी के साथ लुलु इंटरनेशनल एक्सचेंज के उप महाप्रबंधक नागेश प्रभु के अनुसार, “रुपये के एक नए निचले स्तर का परीक्षण करने की उम्मीद थी क्योंकि इसने शुक्रवार को ही कम परीक्षण किया था। आज, इसने USD के मुकाबले 77.52 का परीक्षण किया, और हम उम्मीद करते हैं कि  तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये में और गिरावट आएगी। हमें लगता है कि आने वाले दिनों में यह 78 अंक की ओर बढ़ सकता है।”

जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था ने पूरे बोर्ड में वृद्धि और सुधार के संकेत दिखाए हैं – उच्च इनपुट और श्रम लागत और चल रही आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के बावजूद – मुद्रास्फीति का दबाव जारी है क्योंकि यह मोटे तौर पर लगभग 7.5% होने की भविष्यवाणी की गई है, जो केंद्रीय बैंक के सहिष्णुता बैंड से बहुत दूर है।

वहीं ब्लूमबर्ग के अनुसार, विदेशी फंडों ने इस साल भारतीय इक्विटी से 17.7 बिलियन डॉलर की निकासी की, जो रिकॉर्ड पर सबसे अधिक है, क्योंकि वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक कसने की संभावना ने बाजारों को हिला दिया। मुद्रा को चालू खाते के बढ़ते घाटे और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सहित अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों से भी प्रभावित किया गया है। यहां तक ​​कि पिछले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक की चक्र से बाहर दर में वृद्धि भी रुपये की गिरावट को रोकने में सक्षम नहीं है।

इसी के साथ बीएनपी परिबास के रणनीतिकार सिद्धार्थ माथुर और चिदु नारायणन ने एक नोट में लिखा, “नीति को सामान्य बनाने में तात्कालिकता की आवश्यकता की आरबीआई की मान्यता समर्थन का एक स्रोत है।” “चूंकि इक्विटी प्रवाह ब्याज-दर संवेदनशील प्रवाह पर हावी हो सकता है, घरेलू वित्तीय स्थितियों में तेजी से सख्त होने के परिणामस्वरूप इक्विटी बाजार की भावना में गिरावट से आईएनआर के लिए एक उच्च नकारात्मक जोखिम है।”

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