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दुबई का रेगिस्तान जर्मनी महिला को आया इतना पंसद, घर छोड़कर 40 ऊंटों के साथ वहीं बस गई

दुनिया का शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जो घूमना फिरना ना पसंद करता हो। दुनिया के अधिकतर लोग घुमक्कड़ स्वभाव के होते हैं और मौका मिलते ही सैर पर निकल जाते हैं। फिर दोबारा मौका ढूंढते रहते हैं कि कब उन्हें घूमने के लिए जाने को मिलेगा। आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो टूरिस्ट के तौर पर रेगिस्तान आई और फिर वह लौटकर दोबारा अपने घर नहीं गई।

40 ऊँटों से शुरू किया फॉर्म हाउस

जर्मनी यूरोप महाद्वीप में स्थित एक देश है। जर्मनी की निवासी उरशुला मूश बहुत सालों पहले दुबई की सैर पर आई थी। उन्हें दुबई की संस्कृति, दुबई के लोगों और दुबई के ऊँटों से इतना लगाव हो गया फिर भी अपने देश दोबारा लौटने की सोच ही नहीं पाई और फिर उन्होंने दुबई के रेगिस्तान में ही रहने का मन बना लिया।

दुबई का रेगिस्तान

उरशुला मूश ने अपना देश जर्मनी छोड़कर 39 सौ मील दूर दुबई आ गई। और यह जगह उन्हें इतना भा गई कि उन्होंने यहीं पर बसने का मन बनाते हुए 40 ऊंट खरीद डालें और रेगिस्तान में ही रहने लगी। आपको बता दें कि उरशुला मूश एक इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कंपनी की मालकिन थी मगर उन्हें दुबई इतना भा गई कि वे यही की होकर रह गईं।

कैमल क्वीन के नाम से हैं फेमस

मौजूदा समय में उरशुला मूश दुबई की मशहूर ऊंट मालकिन के नाम से जानी जाती हैं। इतना ही नहीं उनको दुबई की कैमल क्वीन के नाम से पुकारा जाता है। वो अपने दुबई स्थित फॉर्म में ऊंट पालती है और रेगिस्तान घूमने आने वाले पर्यटक को होटल उपलब्ध कराती हैं। उरशुला मूश दुबई में जिस जगह पर रहती हैं। वहां पर ना तो बिजली की व्यवस्था है ना ही पानी की समुचित व्यवस्था है। वह पूरी तरीके से लाइमलाइट से दूर रेगिस्तान में जिंदगी बिता रही हैं।

महज 23 साल की उम्र में बस गईं थी दुबई में

कभी जर्मनी की निवासी रही उरशुला मूश दुबई शहर के बाहर रेगिस्तानी क्षेत्र में रहती हैं। वहां के स्थानीय निवासी बताते हैं कि वे मूल निवासियों (बेदुइन) से ज्यादा अरब की लगती हैं। उरशुला मूश कहती है कि जब वह पहली बार दुबई आई थी तो उन्हें उसी वक्त यह मालूम पड़ गया था कि वह हमेशा यहीं पर रहना चाहेंगे और उन्होंने इसके पहले कभी भी नहीं सोचा था कि वह अपना देश जर्मनी छोड़कर महज़ 23 साल की उम्र में दुबई में रहने लगेंगी। अपने ऊँटों के व्यापार को धीरे धीरे बढ़ा रही हैं इसी के साथ उरशुला मूश ने ऊँटों से प्राप्त होने वाला ऊन भी बेचना शुरू कर दिया है।