UAE में नए श्रम कानून में क्या है कामगारों के लिए वार्षिक अवकाश का नियम, जानिए यहां

संयुक्त अरब अमीरात द्वारा श्रम कानून में संशोधन जारी करने के साथ 2 फरवरी, 2022 से नया नियम लागू हो गया है। ये कानून संयुक्त अरब अमीरात में निजी क्षेत्र में सभी प्रतिष्ठानों, नियोक्ताओं और कामगारों पर लागू होता है। वहीं इस पोस्ट के जरिए हम आपको UAE में कामगारों के लिए नए वार्षिक अवकाश को लेकर क्या कानून है। उसके बारे में बता रहे हैं।

अनुच्छेद (29) वार्षिक अवकाश

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1. इस डिक्री-कानून के मुताबिक, कोई भी कामगार बिना वेतन कटे एक साल के नौकरी में 30 दिन की छुट्टी का हकदार है। इसके साथ ही कोई भी कामगार अगर छह महीने से अधिक और एक साल से कम की सर्विस करता है तो इस दरमियान उस कामगार को प्रति माह दो दिन की छुट्टी लेने का हकदा होगा।

2. अगर कोई कामगार पार्ट टाइम काम करता है तो उसके द्वारा प्रतिदिन काम किए जाने वाले घंटों के अनुसार वार्षिक छुट्टी का हकदार होगा।

3. नियोक्ता प्रोबेशन अवधि के दौरान कामगार को उसके वार्षिक अवकाश में से छुट्टी देने पर सहमत हो सकता है और कामगार की वार्षिक छुट्टी में एडजस्ट कर सकता है। वहीं अगर कामगार सफलतापूर्वक प्रोबेशन अवधि पूरा नहीं करता है तो कामगार के पास बकाया वार्षिक अवकाश शेष के मुआवजे का अधिकार सुरक्षित है।

4. कामगार अपनी सालाना छुट्टी का उपयोग कर सकता है। नियोक्ता काम की आवश्यकताओं के अनुसार और कामगार के साथ समझौते में छुट्टी की तारीख तय कर सकता है, हालांकि कम से कम एक महीने पहले कर्मचारी को उसकी छुट्टी की तारीख के बारे में सूचित करेगा।

New UAE labour law

5. एक कामगार, नियोक्ता की सहमति से और नियमों के आधार पर अपने वार्षिक अवकाश के बचे हुए शेष दिनों को अगले वर्ष में जोड़ सकता है।

6. कामगार वार्षिक अवकाश की अवधि के संबंध में भुगतान का हकदार होगा। कानून या समझौते द्वारा निर्धारित दिनों की गणना की जाएगी और वार्षिक छुट्टी के हिस्से के रूप में माना जाएगा।

7. नियोक्ता कामगार को दो साल से अधिक के लिए अपनी अर्जित वार्षिक छुट्टी का उपयोग करने से नहीं रोक सकता है, जब तक कि कामगार इसके एवज में भुगतान नहीं चाहता हो।

8. एक कामगार अपने अवकाश के दिनों के लिए भुगतान का हकदार होगा यदि वह उसके उपयोग से पहले काम छोड़ देता है। कामगार सेवा की अवधि के अनुपात में वर्ष के अंशों के लिए छुट्टी वेतन का हकदार होगा, और इसकी गणना मूल वेतन के आधार पर की जाती है।

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